Posts

आज का हिन्दुस्तान

Image
आज हम सभी भारतीय बड़े ही अजीबो-गरीब राजनीतिक तानाशाही का सामना कर रहे हैं!! कहने के लिए ये एक लोकतांत्रिक गणराज्य है लेकिन वर्तमान सरकार जिस तरह से पत्रकारों, मीडिया, सोशल साइट्स को कंट्रोल कर रही है वह दिन दूर नहीं है जब हमको सिर्फ एक पार्टी और एक नेता के तारीफ ही करते रहना पड़ेगा क्योंकि आलोचना, समालोचना इनको पसंद नहीं है!!                    आज पूरे देश को धार्मिक और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के माध्यम से बांट दिया गया है!! धर्म का इस्तेमाल नफ़रत फ़ैलाने के लिए किया जा रहा है!!                      विकास के नाम पर सिर्फ एक दो औद्योगिक परिवार को ही पूरे देश की सारी बड़ी योजनाएं सौंपी जा रही है!! किसी भी सरकारी संस्थान में आप चले जाईए बिना करप्शन के कोई भी काम नहीं किया जा रहा है!! हाॅस्पीटल्स में छोटी से छोटी दवा, वैक्सीन उपलब्ध नहीं है क्योंकि डाॅक्टर करप्ट हैं!! हाल ही में मैं एक मुंबई के सरकारी अस्पताल में टेटनस वैक्सीन लेने गया तो मुझे कहा गया कि आपको बाहर स...

Muslims & Islamic Terrorism

Image
मैं यहां कुछ कड़वी सच्चाई आप लोगों से साझा करने जा रहा हूं, अगर पढ़ सकते हैं तो ज़रूर पढ़िएगा - १) विश्व के इतिहास में अबतक की आतंकी घटनाएं इसका सबूत हैं कि ज़्यादातर घटनाएं इस्लामिक जिहाद के नाम पर किया गया है! २) मुसलमानों के लिए किसी की संपत्ति, स्त्री, ज़मीन हड़प लेना उनके लिए कोई गुनाह नहीं होता है!! ३) इस मज़हब की शुरुआत ही लूटपाट, मर्डर, बलात्कार, ज़बरदस्ती मज़हब को अपनाने के लिए फोर्स करना से हुआ है!! ४) इनके लिए पूरे विश्व को मुसलमान बनाना पुण्य का काम है! ५) इनके ज़्यादातर मुफ्ती, मुकर्रम, मौलाना क़ुरान और हदीस को गलत तरीके से लोगों को बताकर उनको दुसरे संप्रदायों के खिलाफ भड़काते हैं!! ६) इनके मज़हब में सवाल करना गुनाह है!! ७) एक बार जो बात क़ुरान और हदीस में कह दी गयी है इनके लिए उसमें कोई तकरीर नहीं कर सकता!! ८) पीठ में छूरा घोंपना, गद्दारी करना इनकी नीयत में होता है!! ९) जो भी लिबरल मुसलमान हैं जैसे कलाकार, पढ़े लिखे बुद्धिजीवी लोग जो पांच वक्त नमाज नहीं पढ़ते इनको सच्चा मुसलमान नहीं माना जाता!! १०) ज़्यादातर मुसलमान अपने ही मज़हब को ठीक से नहीं जानता, बस अंधानुकरण करते जा...

रेप और उसके पीछे की मानसिकता

Image
रेप या बलात्कार हमारे हिन्दुस्तान के समाज की एक डिपली रुटेड बड़ी मानसिक समस्या का प्रतिबिम्ब है!! इसको गहराई से समझने की आवश्यकता है!! आज़ादी से पहले हमारे समाज में बलात्कार नहीं होते थे या बदले स्वरूप में कभी कभार होते थे लेकिन आज़ादी के बाद से अचानक पिछले कुछ १० वर्षों में इतने बलात्कार क्यों होने लगे हैं!! यहां सिर्फ पुरुषों या स्त्रियों के सेक्सुअल डिजायर की बात नहीं है!! बात है एक बहुत बड़े अंतर की जो बचपन से ही लड़का-लड़की में रखा जाता है!! बात है पाश्चात्यीकरण से उपजे सामाजिक ढ़ांचे में हुए बदलाव से जिसने हमारे नैतिक मूल्यों की धज्जियां उड़ाई हैं और आज हम न तो भारतीय हैं न ही पूर्ण विदेशी!! कहीं बीच में फंसे हुए हैं जिसे मैं देसी अंग्रेज या देसी विदेशी होना कहता हूं!! हमारे प्राचीन सांस्कृतिक मूल्यों को देखें तो पाएंगे कि समय के साथ खुद-ब-खुद बदलते हुए अपने नैतिक मूल्यों को स्थापित रखते हुए बहुत ही खूबसूरत भारतीय लोगों को पैदा कर रही थी!! अचानक से आधुनिकीकरण की होड़ में सब गड्ड-मड्ड हो गया!!   आज भारतीय समाज में हम ज़्यादातर पुरुष जिस तरह से स्त्रियों को देख...

भगवान श्री कृष्ण अवतार नहीं तो क्या थे?

Image
भगवान श्री कृष्ण अगर अवतार नहीं तो फिर क्या थे? योगीराज भगवान श्री कृष्ण जब श्री मद्भगवत गीता में विश्वरूप धारण करके कहते हैं कि मैं ही संपूर्ण जगत का पिता और माता हूं तब यह समझना चाहिए कि यह कोई साधारण ग्वाला पुत्र या देवकी नंदन कृष्ण नहीं थे जो बस मनुष्य रुप में आकर कुछ चमत्कार या रासलीला या कंसवध करके या महाभारत युद्ध में मुख्य भूमिका निभाकर चले गए बल्कि उनका पूरा जीवन एक अद्भुत कार्यों से परिपूर्ण है जिसको ध्यान से देखें तो लगता है कि यह कोई साधारण मनुष्य नहीं था बल्कि एक अवतरित पुरुष था जिसने गीता ज्ञान से पूरी मनुष्य जाति को ज्ञान से ओतप्रोत करके चला गया!!                         विश्वरूप योगीराज भगवान श्री कृष्ण सभी कलाओं में पारंगत, सुदर्शन चक्र से युक्त, कुटनीति में माहिर, युद्ध कला में निपुण, वेदों और उपनिषदों के महान् पंडित थे!! उनके जीवन का हर पड़ाव हमें जीवन के अलग अलग प्राथमिकताओं से अवगत कराता है!! बचपन में जीवन को एक खेल की तरह खेलना साथ ही बीच बीच में ये दि...

Acting Schools & Acting Books Are In-vain

Image
मुझे लगता है कि अभिनय सीखने के लिए किसी ऐक्टिंग स्कूल की नहीं बल्कि अभिनय कार्यशाला या अभिनय गुरु या रंगमंच की आवश्यकता होती है!! जीवन से बड़ा कोई स्कूल नहीं हो सकता है!! अभिनय के स्कूल ज़्यादातर काॅमर्शियलाइज्ड इंस्टीच्युशंस होते हैं जहां अभिनय से ज़्यादा राजनीति या पैसे कमाने पर फोकस किया जाता है!! आप इसको अगर ध्यान से बारीकी से देखें तो पता चलता है कि अभिनय कला है और कोई भी कलाकार अपनी कला को जीवन और आसपास से ही सीखता है किसी गुरु या गाइड के देखरेख में!!                         वैसे ही ऐक्टिंग एक प्रैक्टिकल कला है न कि थ्योरिटिकल विषय!! ऐक्टिंग के किताबों या थ्योरीज से ज़्यादा अच्छा है कि अच्छी साहित्यिक पुस्तकें पढ़ी जाए!! कविता कहानियां नाटक से अच्छी कोई किताब नहीं हो सकती है!! आप देखेंगे कि पूरी दुनिया में लाखों लोग अपनी अपनी ऐक्टिंग थ्योरीज लेकर उसको थोपने की कोशिश करते हैं!! जबकि ये आपको कन्फ्यूज करने के अलावा कुछ नहीं करते!! तो बेहतर है कि हिंदी साहित्य या अंग्रेजी साहित्य या विश्व साहित्य को पढ़ें!! ये आपक...

सनातन वैदिक धर्म और हिन्दू

Image
दूसरे संप्रदायों और उनके कुकृत्यों पर चिल्लाने बोलने से पहले ये बताईए कि हम कितने आर्य स्त्री पुरुष अपने सनातन वैदिक धर्म को जानते समझते हैं? उत्तर सबको पता है हम अपने आप को आर्य नहीं बोल के हिन्दू बोलते हैं जबकि हिन्दू या इंडियन शब्द हमारा नहीं है ये हमपर थोपा गया है और हममें से ज़्यादातर भले भारतीय कहें लेकिन दिल से आज भी हम हैं ग़ुलाम देसी अंग्रेज और देसी मुग़ल!!  तो सबसे पहले आवश्यकता है कि हम अपनी मानसिक गुलामी को खत्म करें और अपनी संस्कृति शास्त्र वेद, श्री मद्भगवत गीता, दर्शन, उपनिषद, वाल्मीकि रामायण, महाभारत को पढ़ें और अपने बच्चों को भी पढ़ाएं न कि सिर्फ मंदिर जाकर धर्म का आडंबर करें!! ख़ुद को ठीक कर लो दुनिया ठीक हो जाएगी हम सनातनी ही अपनी संस्कृति पर गर्व नहीं करते और पाश्चात्य संस्कृति को शान से अपनी आत्मा तक में बसाए हुए हैं तो कहां से होगा हिन्दुत्व की रक्षा और सम्मान!! सोचिए, समझिए और बदलिए!! जय हो!! 🕉️🙏🕉️ #देसीअंग्रेज #देसीमुग़ल #सनातन #सनातनवैदिकधर्म #आर्य

हम बहुरूपिया हैं

हम बहुरूपिया हैं अभिनेता हैं अभी मज़दूर हैं अभी नेता हैं। हम स्वांगी हैं स्वांग रचते हैं कभी हंसते हैं अभी नचते हैं। कभी मंत्री हैं अभी संत्री हैं अभी हन्ता हैं कभी हंत्री हैं। पल में शोला पल में शबनम पल में जहाज़ पल में टमटम। कभी थ्री स्टार कभी फ़ाइव स्टार अभी ज़ीरो स्टार कल सेवन स्टार। कभी रीयल लाइफ कभी रील लाइफ कभी ये है वाइफ कभी वो है वाइफ हम कौन हैं हमारा अपना क्या कठपुतली हैं इशारे पे नचता जा। कभी बॉडी अपना कभी सोल किसी का कभी सोल अपना कभी बॉडी किसी का। है मंत्रमुग्ध है दंग मतंग हमें रचनेवाला इतना विशिष्ट कितने हैं रंग वाला प्याला। हम भांड हैं हमारे रुप अनेक हम कौन हैं ये प्रश्न है फ़ेक।।                   © पंकज झा