Acting Schools & Acting Books Are In-vain

मुझे लगता है कि अभिनय सीखने के लिए किसी ऐक्टिंग स्कूल की नहीं बल्कि अभिनय कार्यशाला या अभिनय गुरु या रंगमंच की आवश्यकता होती है!! जीवन से बड़ा कोई स्कूल नहीं हो सकता है!! अभिनय के स्कूल ज़्यादातर काॅमर्शियलाइज्ड इंस्टीच्युशंस होते हैं जहां अभिनय से ज़्यादा राजनीति या पैसे कमाने पर फोकस किया जाता है!! आप इसको अगर ध्यान से बारीकी से देखें तो पता चलता है कि अभिनय कला है और कोई भी कलाकार अपनी कला को जीवन और आसपास से ही सीखता है किसी गुरु या गाइड के देखरेख में!!
                        वैसे ही ऐक्टिंग एक प्रैक्टिकल कला है न कि थ्योरिटिकल विषय!! ऐक्टिंग के किताबों या थ्योरीज से ज़्यादा अच्छा है कि अच्छी साहित्यिक पुस्तकें पढ़ी जाए!! कविता कहानियां नाटक से अच्छी कोई किताब नहीं हो सकती है!! आप देखेंगे कि पूरी दुनिया में लाखों लोग अपनी अपनी ऐक्टिंग थ्योरीज लेकर उसको थोपने की कोशिश करते हैं!! जबकि ये आपको कन्फ्यूज करने के अलावा कुछ नहीं करते!! तो बेहतर है कि हिंदी साहित्य या अंग्रेजी साहित्य या विश्व साहित्य को पढ़ें!! ये आपके सोचने समझने जीवन को देखने की क्षमता में जादूई परिवर्तन लाएंगे!! 🎭😇🎭

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