रेप और उसके पीछे की मानसिकता
रेप या बलात्कार हमारे हिन्दुस्तान के समाज की एक डिपली रुटेड बड़ी मानसिक समस्या का प्रतिबिम्ब है!! इसको गहराई से समझने की आवश्यकता है!! आज़ादी से पहले हमारे समाज में बलात्कार नहीं होते थे या बदले स्वरूप में कभी कभार होते थे लेकिन आज़ादी के बाद से अचानक पिछले कुछ १० वर्षों में इतने बलात्कार क्यों होने लगे हैं!! यहां सिर्फ पुरुषों या स्त्रियों के सेक्सुअल डिजायर की बात नहीं है!! बात है एक बहुत बड़े अंतर की जो बचपन से ही लड़का-लड़की में रखा जाता है!! बात है पाश्चात्यीकरण से उपजे सामाजिक ढ़ांचे में हुए बदलाव से जिसने हमारे नैतिक मूल्यों की धज्जियां उड़ाई हैं और आज हम न तो भारतीय हैं न ही पूर्ण विदेशी!! कहीं बीच में फंसे हुए हैं जिसे मैं देसी अंग्रेज या देसी विदेशी होना कहता हूं!! हमारे प्राचीन सांस्कृतिक मूल्यों को देखें तो पाएंगे कि समय के साथ खुद-ब-खुद बदलते हुए अपने नैतिक मूल्यों को स्थापित रखते हुए बहुत ही खूबसूरत भारतीय लोगों को पैदा कर रही थी!! अचानक से आधुनिकीकरण की होड़ में सब गड्ड-मड्ड हो गया!!
आज भारतीय समाज में हम ज़्यादातर पुरुष जिस तरह से स्त्रियों को देखते हैं, जानते हैं, समझते हैं, टीका-टिप्पणी करते हैं, एक चीज़ समझते हैं उस नजरिए को बदलने की आवश्यकता है!! दमित सेक्स इच्छा को जैसे हम तबज्जो देते हैं उसको ठीक करना ज़रूरी है!! हम पाश्चात्य को अपना आदर्श मानना छोड़ना होगा!! हमारी संस्कृति स्त्रियों को देवी की तरह देखती आई है!! आज भी इसकी झलक हमारे पूजा-पाठ या त्योहारों में नज़र आता है!! अपने परिवार में ही नैतिक मूल्यों की स्थापना करके हम पुरुषों की मानसिकता को ठीक कर सकते हैं ताकि हम पुरुष-महिला के भेद-भाव और अंतर को खत्म कर दें!! साथ ही सेक्स को एक टॅबू की तरह लेना छोड़ना होगा!! सेक्स एक ऐसा काम है जो एक उम्र के बाद सिर्फ एक दिनचर्या की तरह लिया जाना चाहिए!!😇🎭🙏
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