हम बहुरूपिया हैं
हम बहुरूपिया हैं अभिनेता हैं
अभी मज़दूर हैं अभी नेता हैं।
हम स्वांगी हैं स्वांग रचते हैं
कभी हंसते हैं अभी नचते हैं।
कभी मंत्री हैं अभी संत्री हैं
अभी हन्ता हैं कभी हंत्री हैं।
पल में शोला पल में शबनम
पल में जहाज़ पल में टमटम।
कभी थ्री स्टार कभी फ़ाइव स्टार
अभी ज़ीरो स्टार कल सेवन स्टार।
कभी रीयल लाइफ कभी रील लाइफ
कभी ये है वाइफ कभी वो है वाइफ
हम कौन हैं हमारा अपना क्या
कठपुतली हैं इशारे पे नचता जा।
कभी बॉडी अपना कभी सोल किसी का
कभी सोल अपना कभी बॉडी किसी का।
है मंत्रमुग्ध है दंग मतंग हमें रचनेवाला
इतना विशिष्ट कितने हैं रंग वाला प्याला।
हम भांड हैं हमारे रुप अनेक
हम कौन हैं ये प्रश्न है फ़ेक।।
© पंकज झा
Comments
Post a Comment