धर्म
सब अपने अपने धर्म या मत या अधर्म पर चलो लेकिन किसी के मत या विचार या धर्म या परंपरा को भला बुरा मत कहो। और ये बात मैं सबसे कहूंगा कि अधूरा ज्ञान ज़हर होता है और सभी महान् पथ प्रदर्शकों कौ नकारकर अपने आप को प्रो या मॉडर्न या विज्ञान तर्क से ईश्वर को समझने की ईच्छा करना या इतिहास को ही सर्वस्व मानना मूढ़ता है और बहुत बड़ा कुतर्क है। धर्म कभी बुरा हो ही नहीं सकता हां आज जो धर्म के ठेकेदारों ने जो मिलावट किया है ना धर्म और धार्मिक नियमों में वही लड़ाई और हठधर्मिता का कारण है। धर्म बहुत ख़ूबसूरत रास्ता है जीवन जीने का। कट्टरता, जड़ता, हठधर्मिता, कुतर्क, अधर्म ये मिलावट हैं। समझिए और विज्ञान और तर्क से कभी भी ईश्वर को नहीं समझ पाएंगे। विज्ञान और वैज्ञानिक आविष्कार लाभदायक हैं हमारे जीवन को आसान करती हैं परंतु हमें उतना ही नुकसान भी पहुंचाती हैं। विज्ञान और वैज्ञानिक तर्क से कभी भी धर्म या ईश्वर को नहीं समझा जाना जा सकता है।
ये आजकल स्यूडो इंटेलेक्चुअल टाइप, अहम् ब्रह्मास्मि टाइप, अधजल गगरी छलकत जाए टाइप, प्रो हिन्दू, प्रो, मॉड, इंडियन डिस्गाइज़्ड अंग्रेज, लिबरल्स, सेक्यूलर टाइप लोगों की हमारे हिन्दुस्तान में बाढ़ सी आ गई है!! वास्तव में इन्हीं जैसे चिरांडुओं , कूपमंडूकों की वजह से हम इतने साल ग़ुलाम रहे और आज इतना भस्सड़ मचा हुआ है!! समाज में ऐसे लोगों की पहचान करके इनका बहिष्कार बहुत ज़रूरी है! 🎭
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