बच्चे

मुझे लगता है कि हमारे देश में एक ऐक्टिव चाइल्ड ऐव्युज सेल होना चाहिए जो छोटे छोटे मासूम बच्चों के साथ होने वाले टॉर्चर ज़्यादती जो उन बच्चों के मां बाप या रिश्तेदारों के द्वारा ही किया जाता है को रोक सके! इस तरह का टॉर्चर ज़्यादातर मां बाप अपना फ्रस्ट्रेशन निकालने के लिए जाने अनजाने में करते हैं जिसका उन मासूम बच्चों के ऊपर बहुत गहरा दूरगामी असर होता है जो बाद में चलकर सायकोलॉजिकल बीमारी में तब्दील हो जाता है!! छोटे बच्चों में हमारी तरह मैल नहीं जमा होता क्योंकि उनके अंदर बड़ों की तरह सोचने समझने की क्षमता नहीं होती है और उनके सारे ऐक्शन्स नेचर ड्रिवेन होते हैं! उनका रोना, जिद करना, बार बार दूध पीना सब स्वाभाविक ऐक्शन्स होते हैं। समझिए सोचिए और अपने बच्चों को ख़ुद से ही बचाईये। 🎭😇🙏

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